
अमन पठान(CARE OF MEDIA):
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कालेधन की सर्जिकल स्ट्राइक बेअसर साबित हुई। 1000-500 के नोट को बैन किये जाने के फैसले का आम जनता ने स्वागत और पीएम मोदी की जमकर तारीफ भी की, तो कहीं पीएम मोदी को जनता की आलोचना का शिकार भी होना पड़ा। खैर ये तो राजकाज है। सब चलता रहता है।
पीएम मोदी ने जिस मकसद से कालेधन पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। वो तो बेअसर साबित हुई। क्योंकि कालाधन तो रातों रात पीला हो गया। 10 नवंबर को 31700 रूपये प्रति 10 ग्राम मिलने वाला सोना 40 से 50 हजार रूपये के भाव में भी नही मिल पाया। इसका मतलब साफ है कि कालेधन वालों ने अपना कालाधन ठिकाने लगा दिया।
बैंकों में नोट बदलने के लिए गरीब मजदूरों, व्यापारियों और सरकारी कर्मचारियों को धक्के खाने पड़े और अगले दिन भी धक्के खाने पड़ेंगे। कालाधन तो अभी तक बाहर नही आया, लेकिन इस सर्जिकल स्ट्राइक से गरीबों की गरीबी और उनकी जमा पूंजी का अंदाजा जरूर लग गया।
फ़िलहाल कालेधन के बाहर आने की कोई उम्मीद भी नही है, क्योंकि कोर्ट में पुराने नोट के दुबारा चलने के लिए याचिका दायर कर दी गई है। कोर्ट का फैसला आने तक कालाधन जहाँ का तहाँ रहेगा। ₹ 2000 के नए नोट से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा और कालेधन के जमाखोरों को सहूलियत मिलेगी।
कालाधन सफ़ेद हो या न हो, लेकिन ₹ 1000-500 के नोट बंद होने के फैसले ने गरीबों के दामन को गीला जरूर किया है। कहीं मरीज को डॉक्टर ने बंधक बनाया तो कहीं लोग 500 रूपये का नोट लेकर खाना खाने और राशन लेने के लिए बाजार में भटकते नजर आये। इतना ही नही पीएम मोदी का ये फैसला किसी के लिए काल बना तो किसी के अंतिम संस्कार में बाधा भी बन गया।
खैर हमें बजीर-ए-आज़म के इस ऐतिहासिक फैसले का तहेदिल से इस्तकबाल करना चाहिए और साथ ही कालेधन को बाहर लाये जाने की मांग करनी चाहिए। अब जिन्होंने अपने कालेधन को पीला कर लिया है। वो पीला सोना काला कैसे होगा? इस बारे में पीएम मोदी को सोचना चाहिए। इस समय पीएम मोदी को सोने के दामों में भारी गिरावट करने या फिर नोट बैन जैसा कोई मास्टर स्ट्रोक खेलने की जरूरत है। अन्यथा कालाधन अंदर से कभी बाहर नही आएगा।
(यह लेखक का निजी विचार है इस लेख पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए में आप careofmedia@gmail.com पर में कर सकते है |)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कालेधन की सर्जिकल स्ट्राइक बेअसर साबित हुई। 1000-500 के नोट को बैन किये जाने के फैसले का आम जनता ने स्वागत और पीएम मोदी की जमकर तारीफ भी की, तो कहीं पीएम मोदी को जनता की आलोचना का शिकार भी होना पड़ा। खैर ये तो राजकाज है। सब चलता रहता है।
पीएम मोदी ने जिस मकसद से कालेधन पर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। वो तो बेअसर साबित हुई। क्योंकि कालाधन तो रातों रात पीला हो गया। 10 नवंबर को 31700 रूपये प्रति 10 ग्राम मिलने वाला सोना 40 से 50 हजार रूपये के भाव में भी नही मिल पाया। इसका मतलब साफ है कि कालेधन वालों ने अपना कालाधन ठिकाने लगा दिया।
बैंकों में नोट बदलने के लिए गरीब मजदूरों, व्यापारियों और सरकारी कर्मचारियों को धक्के खाने पड़े और अगले दिन भी धक्के खाने पड़ेंगे। कालाधन तो अभी तक बाहर नही आया, लेकिन इस सर्जिकल स्ट्राइक से गरीबों की गरीबी और उनकी जमा पूंजी का अंदाजा जरूर लग गया।
फ़िलहाल कालेधन के बाहर आने की कोई उम्मीद भी नही है, क्योंकि कोर्ट में पुराने नोट के दुबारा चलने के लिए याचिका दायर कर दी गई है। कोर्ट का फैसला आने तक कालाधन जहाँ का तहाँ रहेगा। ₹ 2000 के नए नोट से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा और कालेधन के जमाखोरों को सहूलियत मिलेगी।
कालाधन सफ़ेद हो या न हो, लेकिन ₹ 1000-500 के नोट बंद होने के फैसले ने गरीबों के दामन को गीला जरूर किया है। कहीं मरीज को डॉक्टर ने बंधक बनाया तो कहीं लोग 500 रूपये का नोट लेकर खाना खाने और राशन लेने के लिए बाजार में भटकते नजर आये। इतना ही नही पीएम मोदी का ये फैसला किसी के लिए काल बना तो किसी के अंतिम संस्कार में बाधा भी बन गया।
खैर हमें बजीर-ए-आज़म के इस ऐतिहासिक फैसले का तहेदिल से इस्तकबाल करना चाहिए और साथ ही कालेधन को बाहर लाये जाने की मांग करनी चाहिए। अब जिन्होंने अपने कालेधन को पीला कर लिया है। वो पीला सोना काला कैसे होगा? इस बारे में पीएम मोदी को सोचना चाहिए। इस समय पीएम मोदी को सोने के दामों में भारी गिरावट करने या फिर नोट बैन जैसा कोई मास्टर स्ट्रोक खेलने की जरूरत है। अन्यथा कालाधन अंदर से कभी बाहर नही आएगा।
(यह लेखक का निजी विचार है इस लेख पर अपनी प्रतिक्रिया देने के लिए में आप careofmedia@gmail.com पर में कर सकते है |)