भारतीय जनता पार्टी के महासचिव और सांसद फिरोज वरुण गांधी शुक्रवार को लखनऊ में बदले हुए रूप में नजर आए। मीडिया नेस्ट और सिटीजन फोरम इंडिया की ओर से हुए कॉन्कलेव में शामिल होने आए वरुण गांधी में देश की वर्तमान व्यवस्था, भ्रष्टाचार और राजनीति को लताड़ लगायी। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से सत्ता परिवर्तन एक लक्ष्य है लेकिन ज्यादा महत्वपूर्ण व्यवस्था परिवर्तन है। हम ऐसे देश में रहते हैं जहां दो चेहरे दिखते हैं। एक चेहरा केरल के किसान टी जोसेफ का है जो कर्ज न चुका पाने की वजह से जेल गया, वहीं दूसरा चेहरा भगौड़े विजय माल्या का है जो कर्ज लेकर भाग गया। इसके लिए व्यवस्था ही जिम्मेदार है।
गांधी ने कहा कि माल्या के भागने से परेशान किसान मनमोहन भी हुआ, जिसके बैंक खाते में मात्र 1200 रुपए थे और उसे माल्या का गारंटर दिखाया गया। मुझे लगता भी नहीं कि माल्या कभी देश वापस भी आएगा। उन्होंने कहा कि राजनीति सुधर सकती है जब जार्डन और सिंगापुर की तरह युवाओं को राजनीति में आमंत्रित किया जाए। ‘आइडिया फॉर ए न्यू इंडिया’ कॉन्क्लेव में हिन्दुस्तान टाइम्स की वरिष्ठ सम्पादक सुनीता एरॉन, पद्मश्री परवीन तलहा, प्रो. आरके खाण्डल और पूर्व आईएएस अनीस अंसारी ने अपने विचारों को रखा। कॉन्क्लेव में बड़ी संख्या में कॉलेज के बच्चों ने हिस्सा लिया।
शर्म आती है जब सांसद वेतन बढ़ाने का कहते हैं
सांसद वरुण गांधी ने कहा कि देश की राजनीति और नेताओं से जुड़ी से कई बातों पर शर्म आती है। बहुत बुरा लगता है जब जनता के प्रतिनिधि वेतन बढ़ाने की मांग करते हैं। जबकि वो लग्जरी गाड़ियों से आते हैं, महंगे बंगलों में रहते हैं, फिर क्या जरूरत है वेतन बढ़ाने की। उन्होंने कहा कि जब मैंने संसद में देखा कि कई एमपी सदन में खड़े होकर अपनी सैलरी बढ़ाने की पैरवी कर रहे हैं, तब तत्कालीन स्पीकर मीरा कुमार को पत्र लिख कर मैंने कहा कि अगर सैलरी बढ़ाई जाती है तो मुझे यह स्वीकार नहीं, मेरी न बढ़ाई जाए।
नेहरू की तारीफ
वरुण गांधी इस दौरान अपने परनाना पंडित जवाहर लाल नेहरू पर भी बोले। उन्होंने कहा कि कुछ लोग पंडित नेहरू को लेकर तंज कसते हैं लेकिन क्या वह उनके जितना ज्ञान रखते हैं। क्या वह पंडित नेहरू की तरह साढ़े 15 साल जेल में रह सकते हैं। वरुण बोले, आज मैं फिरोज वरुण गांधी की जगह फिरोज वरुण अहमद होता शायद मैं भी एक दर्शक की तरह किसी नेता को सुन रहा होता।
भारत में भी लागू होना चाहिए जीआरसी
सिंगापुर में ग्रुप रिप्रेजेंटेशन सिस्टम लागू है। इसके तहत किसी व्यक्ति विशेष के बजाय किसी ग्रुप (व्यक्तियों का समूह) को चुनाव में उतारा जाता है जो किसी मुद्दे को लेकर एक साथ होते हैं। इस तरह की व्यवस्था में भारत में लागू की जा सकती है या फिर एक वर्ग विशेष जैसे की किसान और बुनकर आदि का प्रतिनिधित्व करने के लिए किसी व्यक्ति को राज्यसभा में मौका देना चाहिए।
गांधी ने कहा कि माल्या के भागने से परेशान किसान मनमोहन भी हुआ, जिसके बैंक खाते में मात्र 1200 रुपए थे और उसे माल्या का गारंटर दिखाया गया। मुझे लगता भी नहीं कि माल्या कभी देश वापस भी आएगा। उन्होंने कहा कि राजनीति सुधर सकती है जब जार्डन और सिंगापुर की तरह युवाओं को राजनीति में आमंत्रित किया जाए। ‘आइडिया फॉर ए न्यू इंडिया’ कॉन्क्लेव में हिन्दुस्तान टाइम्स की वरिष्ठ सम्पादक सुनीता एरॉन, पद्मश्री परवीन तलहा, प्रो. आरके खाण्डल और पूर्व आईएएस अनीस अंसारी ने अपने विचारों को रखा। कॉन्क्लेव में बड़ी संख्या में कॉलेज के बच्चों ने हिस्सा लिया।
शर्म आती है जब सांसद वेतन बढ़ाने का कहते हैं
सांसद वरुण गांधी ने कहा कि देश की राजनीति और नेताओं से जुड़ी से कई बातों पर शर्म आती है। बहुत बुरा लगता है जब जनता के प्रतिनिधि वेतन बढ़ाने की मांग करते हैं। जबकि वो लग्जरी गाड़ियों से आते हैं, महंगे बंगलों में रहते हैं, फिर क्या जरूरत है वेतन बढ़ाने की। उन्होंने कहा कि जब मैंने संसद में देखा कि कई एमपी सदन में खड़े होकर अपनी सैलरी बढ़ाने की पैरवी कर रहे हैं, तब तत्कालीन स्पीकर मीरा कुमार को पत्र लिख कर मैंने कहा कि अगर सैलरी बढ़ाई जाती है तो मुझे यह स्वीकार नहीं, मेरी न बढ़ाई जाए।
नेहरू की तारीफ
वरुण गांधी इस दौरान अपने परनाना पंडित जवाहर लाल नेहरू पर भी बोले। उन्होंने कहा कि कुछ लोग पंडित नेहरू को लेकर तंज कसते हैं लेकिन क्या वह उनके जितना ज्ञान रखते हैं। क्या वह पंडित नेहरू की तरह साढ़े 15 साल जेल में रह सकते हैं। वरुण बोले, आज मैं फिरोज वरुण गांधी की जगह फिरोज वरुण अहमद होता शायद मैं भी एक दर्शक की तरह किसी नेता को सुन रहा होता।
भारत में भी लागू होना चाहिए जीआरसी
सिंगापुर में ग्रुप रिप्रेजेंटेशन सिस्टम लागू है। इसके तहत किसी व्यक्ति विशेष के बजाय किसी ग्रुप (व्यक्तियों का समूह) को चुनाव में उतारा जाता है जो किसी मुद्दे को लेकर एक साथ होते हैं। इस तरह की व्यवस्था में भारत में लागू की जा सकती है या फिर एक वर्ग विशेष जैसे की किसान और बुनकर आदि का प्रतिनिधित्व करने के लिए किसी व्यक्ति को राज्यसभा में मौका देना चाहिए।