बेबस पिता आंखों में आंसू लिए कलेजे के टुकड़े की लाश कंधे पर लाद कर जिला अस्पताल में भटकता रहा। वह लोगों से मदद मांगता रहा। इमरजेंसी रूम के बाहर लोगों की भीड़ चंदा देने के लिए जुटी रही लेकिन अस्पताल प्रशासन आंख मूंदे बैठा रहा। दो घंटे बाद लोगों ने चंदा देकर शव को रिक्शे पर उसे भिजवाया।
जबकि बच्चे के मौत की जानकारी मिलते ही सीएचसी से आई एंबुलेंस को लेकर ड्राइवर भाग गया। जिले के उमरीबेगमगंज के कन्हईपुरवा निवासी शिवपूजन के चार वर्षीय बेटे सत्यम को तेज बुखार था। उसे शुक्रवार सुबह 11.30 बजे रगड़गंज सीएचसी ले जाया गया, जहां से उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। डेढ़ बजे के करीब शिवपूजन अपने बेटे को लेकर जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचा। चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
चालक छोड़ कर भाग गया
बेटे की मौत का पता चलते ही सीएचसी से आई एम्बुलेंस को चालक लेकर भाग गया। चिकित्सकों ने बेटे की लाश इमरजेंसी के बाहर ले जाने का हुक्म सुना दिया। कंधे पर बेटे की लाश और आंखों में आंसू लिए पिता शिवपूजन इमरजेंसी के बाहर लोगों की तरफ मदद के लिए निहारता रहा। कभी बेटे की लाश शिवपूजन के कंधों पर होती तो कभी पत्नी सुनीता उसे गोदी में उठा लेती थी। वह मदद के लिए अस्पताल परिसर में इधर से उधर घंटों भटकता रहा। बाद में लोगों ने चंदा इकट्ठा कर लाश को घर तक भिजवाने की व्यवस्था की।
बेटे की मौत का पता चलते ही सीएचसी से आई एम्बुलेंस को चालक लेकर भाग गया। चिकित्सकों ने बेटे की लाश इमरजेंसी के बाहर ले जाने का हुक्म सुना दिया। कंधे पर बेटे की लाश और आंखों में आंसू लिए पिता शिवपूजन इमरजेंसी के बाहर लोगों की तरफ मदद के लिए निहारता रहा। कभी बेटे की लाश शिवपूजन के कंधों पर होती तो कभी पत्नी सुनीता उसे गोदी में उठा लेती थी। वह मदद के लिए अस्पताल परिसर में इधर से उधर घंटों भटकता रहा। बाद में लोगों ने चंदा इकट्ठा कर लाश को घर तक भिजवाने की व्यवस्था की।
जिला अस्पताल के परिसर में खड़ी रही एम्बुलेंस
लाश को नि:शुल्क घर तक पहुंचाने वाली एम्बुलेंस जिला अस्पताल के परिसर में खड़ी रही और बेबस पिता बेटे की लाश घर तक पहुंचाने के लिए उसी परिसर में चंदा इकट्ठा करता रहा। जिम्मेदार उधर से आते-जाते रहे लेकिन किसी को भी पिता की बेबसी पर दया नहीं आई।
लाश को नि:शुल्क घर तक पहुंचाने वाली एम्बुलेंस जिला अस्पताल के परिसर में खड़ी रही और बेबस पिता बेटे की लाश घर तक पहुंचाने के लिए उसी परिसर में चंदा इकट्ठा करता रहा। जिम्मेदार उधर से आते-जाते रहे लेकिन किसी को भी पिता की बेबसी पर दया नहीं आई।
नहीं मिली जानकारी: सीएमएस
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. एसके श्रीवास्तव ने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं मिली। अगर सूचना मिलती तो वह एम्बुलेंस से लाश नि:शुल्क घर तक पहुंचवाने की व्यवस्था जरूर करते।
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. एसके श्रीवास्तव ने बताया कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं मिली। अगर सूचना मिलती तो वह एम्बुलेंस से लाश नि:शुल्क घर तक पहुंचवाने की व्यवस्था जरूर करते।