संगमरमरी पत्थरों पर उकेरी गईं फूल और पत्तियां कई स्थानों से अलग हो गईं हैं। कई पत्थरों के पीस टूट चुके हैं, लेकिन एएसआई इनको संरक्षित नहीं कर पा रहा है।
पुरातत्व विभाग के अधिकारी भले ही ताजमहल में संरक्षण कराने का दम भरते रहते हों, लेकिन जब ‘हिन्दुस्तान’ ने इसकी पड़ताल की तो तस्वीर अलग ही नजर आई।
संरक्षण के नाम पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये फूंकने के बाद भी ताजमहल की शान यानी शाहजहां और मुमताज के मजार वाले हिस्से (मुख्य गुंबद) के बाहर लगे पत्थर बेरौनक हो गए हैं। गुंबद के पूर्वी ओर तो कई जगह से पच्चीकारी पत्थरों का साथ छोड़ गई है। पत्थरों पर उकेरे गए लाल, हरे, नीले. सफेद फूल अब पहले की तरह चमक नहीं देते। इनका नूर खत्म हो गया है।
ऐसा इसलिए कि कई पत्थरों पर जड़े दिखने वाले ये फूल और पत्ती अब वहां पर नहीं हैं।
ताजमहल को देखने के लिए दो समय सबसे शानदार माने जाते हैं। एक तो सूर्योदय और दूसरा सूर्यास्त।
सूर्योदय के समय जब सूरज की किरणों मुख्य गुंबद के पत्थरों पर जड़े फूल और पत्तियों पर पड़ती हैं तो ये शीशे के मानिंद चमक उठती हैं। जो काफी मनमोहक दिखाई देता है। यह वह क्षण होता है जब मुख्य गुंबद के हर उस हिस्से को सैलानी अपने कैमरों में कैद करना चाहते हैं जहां पर पच्चीकारी चमकती दिखती है।
मुख्य गुंबद में लगे हैं ये पत्थर
1. एजिट (धुएं के रंग का)
2. कोरनेलियन (गहरा लाल)
3. सीप (सफेद)
4. इंडियन जेड (गहरा हरा)
5. मेलाकाइट (तोतई रंग)
6. टरकोल (आसमानी)
7. लेटिस (गहरा नीला)
ताज के हिंदू मंदिर होने के कोई सबूत नहीं : शर्मा
ताजमहल के हिंदू मंदिर होने को लेकर छिड़ी बहस पर केंद्रीय पर्यटन राज्यमंत्री डॉ. महेश शर्मा ने मंगलवार को केंद्र सरकार के रुख को साफ कर दिया। केंद्रीय मंत्री ने संसद में कहा कि सरकार के पास इस बात का कोई सबूत नहीं है कि ताजमहल कभी हिंदू मंदिर था।
शर्मा एआईएडीएमके के सांसद बी सेनगुट्टुवन द्वारा पूछे गए सवाल पर कहा कि यदि सरकार के पास इस तरह के कोई प्रमाण होते तो स्पष्ट करने की मनाही नहीं थी, लेकिन ऐसा है ही नहीं।
इससे पहले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने भी हाल ही में यह दावा खारिज कर दिया गया था कि 17वीं सदी का मुगल स्मारक ताजमहल कभी शिव मंदिर था।
केंद्रीय पर्यटन राज्यमंत्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि इस मामले को लेकर दायर की गई याचिका की उन्हें जानकारी तो है, लेकिन पर्यटन पर असर पड़ने और विवाद होने के चलते सरकार इस मामले पर गौर करने की जरूरत नहीं समझती है।
http://www.livehindustan.com/news/uttarpradesh/article1-tajmahal-stones-discharged-culture-minister-mahesh-sharma-in-agra-506343.html