कहीं नॉक आउट मैच न साबित हो भाजपा के लिए बिहार का तीसरा चरण..!

बिहार विधानसभा चुनाव का तीसरा चरण सही मायनों में भाजपा के लिए नाक आउट मैच के समान होगा। वजह यह है कि पहले दो चरणों में वह लालू-नीतीश के रूप में दलितों व पिछड़ों की एकजुटता से बड़े अंतर से पिछड़ चुकी है। लिहाजा तीसरे चरण में उसे निर्णायक लीड लेनी होगी, ताकि वह मुकाबले में बना रहे। हालांकि इसके आसार बहुत कम हैं। अलबत्ता शहरी इलाकों में उसे कुछ लाभ मिलने की उम्मीद है, लेकिन लालू-नीतीश के कारण शहरों में उसे शहरों में भी नाकों चने चबाने पड़ सकते हैं।
आइए शुरुआत राजधानी पटना के सीटों से करते हैं, जिन विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा मुकाबले में दिखाई देती है, उनमें पटना की तीन सीटें बांकीपुर, पटना साहिब और कुम्हरार अहम हैं। बांकीपुर और कुम्हरार के इलाके में सवर्ण वोटर अधिक हैं, लिहाजा यहां उसके लिए कोई चुनौती नहीं है। लेकिन पटना साहिब विधानसभा क्षेत्र में नंद किशोर यादव फ़ंस गए हैं। सूत्रों की मानें तो भाजपा के एक बड़े नेता उन्हें हरवाने की जी तोड़ कोशिश में जुट गए हैं। एक स्थानीय विधान पार्षद अपनी जाति के लोगों को महागठबंधन के प्रत्याशी को वोट देने की परोक्ष रूप से अपील कर रहे हैं।
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दरअसल, श्री यादव के मुकाबले में महागठबंधन ने संतोष मेहता को मैदान में उतारा है। उम्मीद की जा रही है कि उन्हें कुशवाहा मतदाताओं का साथ मिलेगा। साथ ही उन्हें मुसलमानों और यादवों का समर्थन भी हासिल होगा। इस कारण नंद किशोर यादव लड़ाई हारने की स्थिति में आ गए हैं। वैसे इस पूरे इलाके में नंदकिशोर यादव के खिलाफ़ स्थानीय जनता में आक्रोश है। आक्रोश इसलिए कि लगातार विधायक रहने के बावजूद उन्होंने क्षेत्र के विकास को लेकर संजीदा नहीं रहे। इसके अलावा श्री यादव ने यादवों की तुलना में हमेशा सवर्णों को तरजीह दिया है। इस कारण भी पटना साहिब क्षेत्र के यादव उनके खिलाफ़ हैं।
भाजपा के पक्ष में एक और सीट जाती दिख रही है, वह दानापुर विधानसभा क्षेत्र है। हालांकि बदले समीकरण के कारण हालात बदले हैं। निवर्तमान भाजपा विधायक आशा सिन्हा यादव हैं और उनके मुकाबले में खड़े महागठबंधन के प्रत्याशी राज किशोर यादव भी यादव हैं। यादव बहुल दानापुर में लड़ाई दो यादवों के बीच है, तो फ़ैसला भी यादव मतदाता ही करेंगे। हालांकि दानापुर के इलाके के नये वाशिंदों जिनमें सवर्ण अधिक हैं, वे भाजपा के पक्ष में वोटिंग कर सकते हैं। लिहाजा राजकिशोर यादव की जीत तभी मुमकिन है, जब दानापुर के यादव शतप्रतिशत एकजुट हों।
वहीं दूसरी ओर मनेर विधानसभा क्षेत्र में भी लड़ाई कुछ ऐसी ही है। राजद प्रत्याशी भाई वीरेन्द्र और भाजपा के प्रत्याशी श्रीकांत निराला आमने-सामने हैं। बताया जाता है कि अकूत धन संपत्ति वाले श्रीकांत निराला पहले राजद में थे, लेकिन रामकृपाल यादव के समर्थक थे। लिहाजा यह देखना दिलचस्प होगा कि मनेर से इस बार बाजी कौन मारेगा। हालांकि उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष हुए लोकसभा चुनाव में मनेर की जनता ने मोदी लहर के बावजूद राजद को करीब 10 हजार वोटों की लीड दी थी।
पटना की सीटों में दिलचस्प मुकाबला यादव-कोईरी बहुल पालीगंज और भुमिहार बहुल बिक्रम विधानसभा क्षेत्र भी है। बिक्रम में यादव वोटर भी निर्णायक संख्या में है, लिहाजा जीत का फ़ैसला यादव मतदाताओं की गोलबंदी करेगी। यह गोलबंदी पालीगंज में मतदाताओं की गोलबंदी पर निर्भर करेगी जो मनेर से प्रत्यक्ष संबंध रखता है। संभवतः यही वजह है कि पीएम नरेंद्र मोदी ने बिहटा में चुनावी रैली करने का निर्णय लिया है। हालांकि स्थानीय लोगों के मुताबिक इस बार श्री मोदी को पूरे इलाके की जनता के विरोध का सामना करना पड़ेगा।
Bihar-Assembly-Election-2015
उधर, फ़तुहां में यादव-कुर्मी-कोईरी मतदाताओं की एकजुटता ने भाजपा को पीछे करने में लगभग कामयाब हो चुकी है। बख्तियारपुर में भी उसे हार का सामना करना पड़ सकता है। असल लड़ाई बाढ़ और मोकामा में है। इन दोनों क्षेत्रों में मोदी एंड कंपनी और लालू-नीतीश दोनों की साख दांव पर है। हालांकि यह महज अनुमान मात्र है। वजह यह है कि इन दोनों क्षेत्रो में भी दलितों-पिछड़ों की निर्णायक संख्या है। लिहाजा सबकुछ दलित-पिछड़ों की एकजुटता पर निर्भर करेगा।
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