
भारतीय जनता पार्टी पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिया गया पारदर्शिता के बयान का असर नहीं हुआ है। यही वजह है कि भारतीय जनता पार्टी के मुख्यालय में फाइल की गई आरटीआई का जवाब अब तक नहीं दिया है।
अमर उजाला में छपी खबर के अनुसार आरटीआई एक्टिविस्ट ने आवेदन में नोटबंदी और पार्टी को मिलने वाले चंदे के बारे में जानकारी मांगी थी। आरटीआई एक्टिविस्ट वेंकटेश नायक ने बताया कि उन्होंने 11 नवंबर 2016 को भारतीय जनता पार्टी के दिल्ली स्थित कार्यालय में एक आरटीआई आवेदन लगाया था।
इस आवेदन में पूछा था कि पिछले एक साल में पार्टी का कितना चंदा, नोटबंदी को लेकर पार्टी ने सरकार को किस तरह के सुझाव मांगे। लेकिन पार्टी ने इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया। जबकि इंडिया पोस्ट के ट्रैकिंग सिस्टम से पता चला कि 16 नवंबर को यह आवेदन पार्टी कार्यालय ने रिसीव कर लिया है। लेकिन करीब दो माह बाद भी पार्टी की ओर से वेंकटेश को जवाब में भाजपा के जनसूचना अधिकारी द्वारा 9 जनवरी तक कोई पत्र नहीं मिला।
इस आवेदन में पूछा था कि पिछले एक साल में पार्टी का कितना चंदा, नोटबंदी को लेकर पार्टी ने सरकार को किस तरह के सुझाव मांगे। लेकिन पार्टी ने इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया। जबकि इंडिया पोस्ट के ट्रैकिंग सिस्टम से पता चला कि 16 नवंबर को यह आवेदन पार्टी कार्यालय ने रिसीव कर लिया है। लेकिन करीब दो माह बाद भी पार्टी की ओर से वेंकटेश को जवाब में भाजपा के जनसूचना अधिकारी द्वारा 9 जनवरी तक कोई पत्र नहीं मिला।