चुनाव आये तो नेताओं को मुसलमानों की याद आई

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उत्तर प्रदेश में चुनावी सरगर्मियां तेज होते ही राजनेताओं को मुसलमानों की याद आने लगी। कोई मुसलमानों को योजनाओं की रेबड़ी बाँट रहा है तो कोई मुसलमानों को उनका हक न मिलने की आवाज को बुलंद कर रहा है। बेवकूफ मुसलमान यूपी विधानसभा चुनाव में फिर सियासत की शतरंज का मोहरा बनेगा।

सवाल ये नही टूटा के बच गया शीशा, सवाल ये है कि पत्थर किधर से आया है? इन पंक्तियों का अर्थ सिर्फ इतना है कि मुस्लिम हितैषी होने का दावा करने वाले अखिलेश यादव की समाजवादी सरकार ने यूपी के कितने मुसलमानों को सरकारी नौकरियां दीं। सपा सरकार ने सजातीय लोगों को ही हर  क्षेत्र में आगे बढ़ने के अवसर प्रदान किये हैं। अगर समाजवादी पेंशन योजना की बात करें तो मुसलमानों को कुछ हद तक सपा सरकार ने लाभ दिया है। इसका मतलब ये नही कि समाजवादी पेंशन देकर सपा सरकार ने मुसलमानों को खरीद लिया हो।

युवाओं को रोजगार का सपना दिखाने वाली अखिलेश सरकार ने नौकरी न मिलने तक बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया था। युवाओं को न रोजगार मिला और न बेरोजगारी भत्ता? ये तो वही बात हुई न खुदा मिला और न ही बिसाल-ए-सनम? एक बात समझ में नही आती अखिलेश सरकार ने जिसका आज तक कोई भला नही किया वो लोग क्यों सपा का झंडा लेकर अखिलेश यादव जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं।
अब बात करते है बहन मायावती की। आज मायावती भी मुसलमानों के हक़ के लिये फिक्रमंद हैं। चिल्ला चिल्लाकर कह रही हैं कि सपा सरकार ने मुसलमानों के लिए कुछ किया। सिर्फ उनका शोषण किया है। ये वही मायावती हैं, जिन्होंने बीते दिनों अपने एक बयान में मुसलमानों को गद्दार कहा था। मायावती का बयान भी बता दें। उन्होंने कहा था कि अगर मुसलमान गद्दारी न करें तो 2017 में बसपा की पूर्ण बहुमत से सरकार बनेगी।
अब कांग्रेस की ओर रुख करते हैं। कांग्रेस ने 10 साल केंद्र में लगातार शासन किया, लेकिन मुसलमानों को क्या हासिल हुआ। सबने मुसलमानों के जरूरतों के ज़ख्मों पर वादों का मरहम ही लगाया। मुसलमानों की जरूरतों के जख्म नासूर बन गए, लेकिन किसी ने उसका इलाज नही किया। आज देश का मुसलमान हर तरह से विकास की कतार में सबसे पीछे खड़ा है।
अब चुनावी बरसात का मौसम आ गया है। फिर वही लुभावने चुनावी वादों से मुसलमानों के दिल बहलाये जाएंगे, लेकिन उस पर अमल नही किया जायेगा। क्योंकि अगर मुसलमानों की जरूरतें पूरी हो गईं तो फिर मुसलमानों को सियासत का मोहरा कैसे बनाया जायेगा। एक खास बात और बताते चलें कि मुस्लिम वोट की ठेकेदारी करने वाले नेता सक्रिय हो चुके हैं। वो आपको बेवफूक बनाकर अपना उल्लू सीधा कर लेंगे और हम जैसे पत्रकार आपको जागरूक करने के लिए प्रयासरत रहेंगे। इस शेअर के साथ बात ख़त्म
कब तक झूठे वादों से दिल बहलाये जायेंगे।
क्या ऐसे ही सुनहरी ख्याब दिखाये जाएंगे।।
(Aman Pathan, care of media)

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