एसिड अटैक विक्टिम शबीना को मिला हमसफर


 

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर में चमनगंज में शबीना एसिड अटैक कांड को बारह साल हो चुके है,पहले का वह मंजर जब याद आता है तो रुह कांप जाती हैं इतने अर्सें से पीड़ित बेटी के लिए ढुंढ रहे जिम्मेदार हमसफर का इंतजार खत्म हुआ और बड़े शान शौकत से बाबूल ने घर  से बेटी को विदा किया। 

upuklive की रिपोर्ट के अनुसार विदाई के वक्त लोगों की आंखे नम थी तो वहीं दुल्हे के इस कदम की सरहना की।बताते चले कि आज से बारह वर्ष पूर्व शादी से इनकार करने पर वसीम ने चमनगंज निवासिनी शबीना के चहेरे पर तेजाब डाल दिया। युवती चेहरा और आधा शरीर बूरी तरह जल गया। 

इस बावत में भले ही आरोपी जेल की सजा काट रहा हो, लेकिन एसिड अटैक पीड़िता कई साल तक इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती रही।आखिरकार चिकित्सकों ने उसकी जान तो बचा ली पर चेहरा बूरी तरह झुलस गया कि उसे कोई भी देखता तो डर जाता है। 

यह हालत को देख युवती के लिए कोई भी रिश्ता नहीं आता था। शादी के लिए परिजन ऐसे हमसफर को तलाशते रहे जो उसे हर कदम पर साथ खड़ा हो घरवालां की यह तलाश अब जाकर खत्म हुई। हमसफर बनने के लिए पड़ोसी शमशाद ने शादी का प्रस्ताव रखा तो शबीना के पिता की खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

शबीना के घर बारात आई तो पड़ोसियों ने पिता की हर प्रकार से मदद की और बाराती बन बैठे। समाजसेविकाओं ने भी शादी में शामिल होकर शबीना को आर्शीवाद दिया। 

मस्जिद के काजी ने शबीना और शमशाद को निकाह पढ़ाया और बाबूल ने हंसी खुशी से बेटी को विदा किया। बिटियां की विदाई में जहां हर आंख नम थी तो उसके हमसफर के लिए दुआएं थी। लोगों ने शमशाद के इस कार्य को सराहा और समाज में एक मिशाल होने की बात कही। 


शमशाद से निकाह करने के बाद शबीना ने अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि मुझे पता था कि अगर उसने जख्म दिया है तो मरहम भी वहीं देगा। लेकिन इतने साल लग जायेंगे यह नहीं पता था। खैर जो भी हुआ उसमे अल्लाह की रजामंदी थी, बस उसने मुझे ऐसा हमसफर दिया है इसका शुक्रिया अदा कर अपने आने वाले दिनों की दुआ मांगती हूॅं।

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