सातवें वेतन आयोग की सिफारिश की गाज रेलवे कर्मचारियों पर गिरी

सातवें वेतन आयोग की सिफारिश की गाज रेलवे कर्मचारियों पर गिरी : रेलवे बोर्ड ने जारी किया ये आदेश

नई दिल्ली: सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट के लगभग पूरा का पूरा केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया और 1 जनवरी 2016 से यह रिपोर्ट  लागू कर दी गई. यह अलग बात है कि केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाले कई कर्मचारियों ने रिपोर्ट के कई मुद्दों पर आपत्ति जताई है.

बावजूद इसके दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक उपक्रम यानि भारतीय रेलवे ने सातवें वेतन आयोग की एक और सिफारिश के तहत नया आदेश दिया है जिससे लगभग सभी कर्मचारी प्रभावित होंगे. जानकारी के लिए बता दें कि वेतन आयोग ने यह सिफारिश केवल रेलवे के लिए ही नहीं की बल्कि केंद्र सरकार के अधीन आने वाले अन्य सभी विभागों के लिए की है.

14 दिसंबर को जारी आदेश के अनुसार अब रेलवे कर्मचारी त्यौहारी मौसम में बिना किसी ब्याज के मिलने वाले एडवांस का लाभ नहीं ले सकेंगे. रेलवे बोर्ड के आदेश संख्या आरबीई नं. 147 /2016 और चिट्ठी संख्या 2016/ई(एलएल)/एफए/1 के तहत यह सभी कार्यालयों में भेज दिया है. इस आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह आदेश तुरंत प्रभाव से लागू होगा.
ndtv की वेबसाइट मीन छपी खबर के अनुसार जब इस बारे रेलवे कर्मचारियों के संघ एआईआरएफ के नेता शिवगोपाल मिश्रा से एनडीटीवी ने संपर्क किया तब उनका कहना था कि बोर्ड के इस आदेश से लगभग रेलवे का हर कर्मचारी प्रभावित होगा. उन्होंने बताया कि रेलवे में 13 लाख कर्मचारी काम करते हैं. उनका कहना है कि आधे से ज्यादा कर्मचारी रेलवे द्वारा उपलब्ध कराई जा रही इस सुविधा का लाभ उठाया करते थे.

उन्होंने रेलवे बोर्ड द्वारा सातवें वेतन आयोग की सिफारिश पर इतनी जल्दबाजी पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि जब यह मुद्दा कर्माचारियों की ओर से सरकार द्वारा बनाई गई अधिकार प्राप्त अलाउंस समिति के पास है तब इस पर रेलवे बोर्ड को यह आदेश देने की क्या जरूरत थी.
शिवगोपाल मिश्रा ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने रेलवे बोर्ड को चिट्ठी लिखकर कर्मचारियों की ओर से विरोध दर्ज करवा लिया है. उन्होंने बताया कि अलाउंस समिति के पास भी इस मुद्दे को उठाया गया है.

रेलवे कर्मचारियों के नेता का कहना है कि सरकार द्वारा इस बंद करने का कारण भी समझ से परे है. कर्मचारी इस सुविधा का लाभ लेते थे तो इसका पूरा पैसा वापस आ रहा था. इसमें 100 प्रतिशत रिकवरी थी और रेलवे पर न तो इसका कोई बोझ था न ही इससे किसी प्रकार का नुकसान हो रहा था.

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