न्यूयॉर्क । देशभर में अचानक लागू की गयी पांच सौ और एक हज़ार रुपये की नोट बंदी से दूसरे देशो में रह रहे भारतीय मूल के लोग भी प्रभावित हुए हैं । सरकार के निर्णय से नाराज़ अप्रवासी भारतीय आगामी 27 नवम्बर को न्यूयॉर्क में भारतीय काउंसलेट के समक्ष प्रदर्शन करेंगे और ज्ञापन देंगे ।
इंडियन नेशनल ओवरसीज कांग्रेस (आईएनओसी) अमेरिका के पूर्व अध्यक्ष जुनेद क़ाज़ी ने बताया कि भारत के लगभग तीस लाख लोग अमेरिका में काम करते हैं वहीँ दुनियाभर में अप्रवासी भारतीयों की तादाद पांच करोड़ से भी अधिक है । उन्होंने कहा कि यदि एक एनआरआई के पास पांच हज़ार रुपये मान लिए जाएँ तो पांच करोड़ भारतीयों के पास कुल 25 हज़ार करोड़ के पुराने नोट होंगे । हम सरकार से मांग करते हैं कि वह अप्रवासी भारतीयों के पुराने नोट बदलवाने के लिए कोई रास्ता निकाले ।
जुनेद क़ाज़ी ने कहा कि जब देश में ऐसी परिस्थितियां हैं कि वहां रहने वाले लोग अपने नोट नही बदलवा पा रहे उन्हें लंबी लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है तो दूसरे देशो में रह रहे भारतीय किस तरह अपनी करेंसी बदलवा सकते हैं । उन्होंने कहा कि सरकार को अप्रवासी भारतीयों के हितो को ध्यान में रखते हुए ऐसे इंतजाम करने होंगे जिससे अगले पांच साल में जब भी अप्रवासी भारतीयों का स्वदेश आना हो उस समय एयरपोर्ट पर अथवा किसी विशेष बैंक शाखा में जाकर करेंसी बदली जा सके ।
जुनेद क़ाज़ी ने कहा कि अप्रवासी भारतीय देश की अर्थ व्यवस्था को मजबूती देते हैं । वे दूसरे देशो में मेहनत करके कमाया गया पैसा भारत में निवेश करते हैं । सरकार को चाहिए कि वह अप्रवासी भारतीयों की तकलीफो पर गौर करे और उनपर कोई तुगलकी फरमान न थोपे ।
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