नई दिल्ली: यूपी समेत देश के पांच राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 500 और 1000 रुपए के नोट बंद करने के फैसले से तमाम राजनीतिक दल एक दूसरे को तगड़ा झटका लगने का आरोप-प्रत्यारोप में जुटे हैं. तो क्या वाकई इस फैसले से विधानसभाव चुनाव में राजनीतिक दलों की रणनीति से लेकर प्रचार तक सबपर असर पड़ सकता है. जानकारों की मानें तो पीएम मोदी का यह फैसला कई राजनीतिक दलों के मंसूबे पर पानी फेर सकता है तो वहीं कई पार्टियों को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर भी कर सकता है.
वोट के लिए बंटते हैं नोट!
ये कहना शायद गलत नहीं होगा कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में आज भी वोट के बदले नोट का परंपरा जोर शोर से चली आ रही है. खुद चुनाव आयोग ने भी इसे स्वीकार किया है कि तमाम राजनीतिक दल वोटर्स को लुभाने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाते हैं. जिनमें वोट के बदले नोट का भी चलन है.
आपको बता दें कि राजनीतिक दलों के इन्हीं हथकंडों को ध्यान में रखते हुए चुनाव आयोग ने एक नियम लागू किया था. जिसके मुताबिक सभी पार्टियां आचार संहिता लागू होने के बाद से होने वाले सभी खर्चों का लेखा-जोखा चुनाव आयोग को देंगी. इतना ही नहीं खुद इलेक्शन कमीशन भी इस पर निगरानी भी रखता है. इसके बावजूद जानकार इस बात से इन्कार नही करते कि चुनाव के दौरान बिना लेखा जोखा वाले पैसे धड़ल्ले से खर्च होते हैं.
ऐसे में एक्सपर्ट्स का भी मानना है कि मोदी सरकार के इस फैसले का असर यूपी समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव लड़ने वाली पार्टियों की तैयारियों पर भी पड़ सकता है. हालांकि पार्टियां केंद्र सरकार के इस कदम से खुद पर किसी तरह का असर होने से मना कर रही है.बड़ी पार्टियों पर पड़ेगा इसका ज्यादा असर: एस वाई कुरैशी
केंद्र सरकार के इस फैसले पर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त शहाबुद्दीन याकूब कुरैशी ने कहा, ”500 और 1000 रुपए के नोट बंद होने का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर बहुत गहरा असर पड़ेगा. हालांकि राजनीतिक दल इसका कुछ ना कुछ हल जल्द से जल्द निकाल लेंगे. लेकिन इसके बावजूद अगले कुछ दिनों तक इससे यूपी चुनाव प्रचार प्रभावित रहेगा.”
कुरैशी ने कहा, ”केंद्र सरकार के इस फैसले का सबसे अधिक असर बड़े राजनीतिक दलों पर पड़ेगा क्योंकि बड़ी पार्टियां चुनाव प्रचार में अधिक पैसे खर्च करती हैं. ऐसे में जो पैसा विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार-प्रसार के लिए जा चुके हैं, उसे एक्सचेंज करना आसान नहीं होगा.”
कुरैशी के मुताबिक 500 और 1000 रुपए के नोट बंद होने की स्थिति में राजनीतिक दल सबसे पहले चुनाव प्रचार के लिए बाहर गए पैसों को वापस मंगाएंगे और फिर किसी ना किसी तरह से कुछ ना कुछ ब्यवस्था करेंगे और इस समस्या का हल ढूढ़ेंगे. उन्होंने कहा कि बड़े नोटों के बंद होने के बाद अब ये देखना जरुरी है कि राजनीतिक दल कितनी जल्दी इसका बैकअप तलाशते हैं. जो पार्टी जितनी जल्दी इस प्रॉब्लम को सॉल्व कर लेगी वो चुनाव में उसका उतने ही अच्छे से फायदा उठा पाएगी.
नोटबंदी का चुनाव पर पड़ेगा काफी गहरा असर: पूर्व डीजीपी
इस पर यूपी पुलिस के भूत पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने कहा, ”केंद्र सरकार के इस फैसले से यूपी चुनाव में मानों भूचाल आ जाएगा. क्योंकि पिछले कई सालों से यूपी में लूट मची हुई है और यही कालाधन चुनाव प्रचार में वोटर्स को लुभाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.”
सिंह ने कहा कि चुनाव में कालेधन का इस्तेमाल काफी आम बात हो गई है. अब तो अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में चुनाव के दौरान वोटर्स को पैसों के जरिए लुभाने की कोशिश की जाती है. यूपी में तो इसका दायरा और भी बढ़ जाता है. हालांकि राजनीतिक दल किसी ना किसी जुगाड़ के जरिए इस समस्या से निजात पाने की कोशिश करेंगे लेकिन इसके बावजूद चुनाव में इसका काफी गहरा असर दिखेगा.
प्रकाश सिंह के मुताबिक, ”यूपी चुनाव में इसका सबसे अधिक असर स्थानीय-क्षेत्रीय पार्टियों पर पड़ेगा. क्योंकि ये पार्टियां वोटर्स को प्रभावित करने के लिए बूथ लेवल तक पैसे पहुंचाने का काम पहले से ही शुरु कर चुकी होंगी. ऐसे में 500 और 1000 रुपए के नोट बंद होने से उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा.”
1,039 करोड़ रुपए कैश
चुनाव में नकदी के चलन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले तीन लोकसभा चुनावों के दौरान पार्टियों ने जहां 1299.53 करोड़ रुपए चेक आदि के जरिये कलेक्ट किया गया था, तो वहीं 1,039 करोड़ रुपए कैश के रूप में जुटाया गया था.
चुनाव प्रचार के लिए कलेक्ट हुआ था 2,356 करोड़ रुपए फंड
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स के मुताबिक पिछले तीन लोकसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों कुल 2,356 करोड़ रुपए फंड कलेक्ट करने की घोषणा की थी. इसमें से 44 फीसदी रकम नकदी के रूप में कलेक्ट की गई थी. इतना ही नहीं पिछले आम चुनाव और विधानसभा चुनाव के दौरान पुलिस ने भारी मात्रा में कैश बरामद किया था. पुलिस के मुताबिक ये रकम चुनाव प्रचार में कालेधन के रुप में इस्तेमाल होने वाली थी.
नोट बंद होने से राजनीतिक दलों में खलबली
आपको बता दें कि अगले साल यानी 2017 में यूपी के साथ-साथ पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में भी विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इससे पहले 500 और 1000 के नोट बंद होने से राजनीतिक दलों में खलबली मच गई है. खैर जो भी हो लेकिन मोदी सरकार के इस फैसले के बाद चुनाव को लेकर कलेक्ट किया गया फंड जो 500 और 1000 रुपए के रुप में होगा उसे एक्सचेंज करना राजनीतिक दलों के लिए आसान नहीं होगा. ऐसे में देखना ये है कि राजनीतिक दल कैसे इस समस्या से निजात पाती हैं?(ABP NEWS)
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