डाकू मलखान सिंह भी नोट बदलवाने पहुंचा बैंक


ग्वालियर। 500 और 1000 रुपए के नोट बंद किए जाने के बाद, इन दिनों उनके बदले नई करेंसी लेने बैंकों में भीड़ उमड़ रही है। भीड़ इस कदर परेशान है कि क्या खास, क्या आम और क्या 'डाकू' सभी अपनी बारी के इंतजार में हैं।

 कुछ ऐसा ही शुक्रवार को ग्वालियर में भी देखने को मिला, जहां डाकू मलखान सिंह भी लोगों की भीड़ में नोट बदलवाने के लिए खड़े नजर आए।
लंबी घनी काली दाढ़ी, रौबदार आंखें, गले तक लटकते बाल और कंधे में बंदूक टांगे मलखान पहले शायद ही इतना बेबस नजर आया हो।

आम लोगों की ही तरह मलखान सिंह भी घंटों बैंक की लाइन में धक्के खाते हुए अपनी बारी के इंतजार में खड़े रहे। नोट बदलवाने के लिए ग्वालियर में रह रहे आत्मसर्पित डाकू मलखान सिंह भी बैंक पहुंचे, लेकिन भीड़ में किसी ने भी इस पुराने 'कुख्यात डाकू' को कोई तवज्जो नहीं दी।
70 और 80 के दशक तक डाकू मलखान सिंह का खौफ बीहड़ों में हावी था। बीहड़ का बच्चा-बच्चा मलखान के किस्सों से रूबरू था और मलखान के एक इशारे पर लोग घरों में दुबक जाते थे, लेकिन आज स्थितियां बदली हुई थी। मलखान 'सिस्टम' के धक्के खा रहा था, जैसा सदियों से इस मुल्क में आम लोग खाते आए हैं। मलखान परेशान था, जैसा कोई आम शख्स अपनी बारी के इंतजार में काउंटर पर टकटकी लगाए हुए।
1983 में समर्पण करने के दौरान डकैत मलखान सिंह वो सबसे बड़ा इनामी डकैत था जिसकी पुलिस को तलाश थी। जिसका आत्मसमर्पण पुलिस के लिए किसी उपलब्धि से कम नहीं था। मलखान अभी ग्वालियर में रहते हैं। आराम की जिंदगी गुजार रहा ये डकैत आज अपने पुराने नोटों के बदले नई करेंसी लेने कंधे पर बंदूक डाल कर बैंक पहुंचा था।

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