हर इंसान की ख्वाहिश होती है कि वो सबसे बेहतर व सुंदर दिखे। इसीलिए हम मेकअप, श्रृंगार और न जाने क्या-क्या करते हैं।

इन-दिनों शारीरिक सुंदरता से ही इंसानों के लिए राय बना ली जाती है। लेकिन सुन्दर होने का अर्थ सिर्फ मेकअप या बेहतर दिखना ही नहीं होता बल्कि शारीरिक सफाई होना भी ज़रूरी है।
अगर सफाई की बात की जाती है तो लगता है की रोज़ नहाना-धोना ही शरीर के सफाई के लिए काफी है। मगर ये गलत है। हमारे शरीर में ऐसे कई अंग हैं जो नहाने के बावजूद भी बहुत गंदे रह जाते हैं। माना जाता है कि सबसे गंदी वैजाइना होती है, जहां ढेरों गंदगियां होती हैं।
लेकिन यह बिलकुल भी सच नहीं है। माना की इससे अजीब तरह की गंध आती है पर जो बैक्टीरिया इसमें मौजूद होते हैं वो अच्छे हैं। और रोगों से लड़ने में मदद करते हैं। यह इन्फेक्शन से लड़ते हैं और इसे स्वस्थ बनाए रखते हैं। लगता है कि ये साफ नहीं होते पर शारीर के कई अन्य अंगो से साफ होते हैं।

इन-दिनों शारीरिक सुंदरता से ही इंसानों के लिए राय बना ली जाती है। लेकिन सुन्दर होने का अर्थ सिर्फ मेकअप या बेहतर दिखना ही नहीं होता बल्कि शारीरिक सफाई होना भी ज़रूरी है।
अगर सफाई की बात की जाती है तो लगता है की रोज़ नहाना-धोना ही शरीर के सफाई के लिए काफी है। मगर ये गलत है। हमारे शरीर में ऐसे कई अंग हैं जो नहाने के बावजूद भी बहुत गंदे रह जाते हैं। माना जाता है कि सबसे गंदी वैजाइना होती है, जहां ढेरों गंदगियां होती हैं।
लेकिन यह बिलकुल भी सच नहीं है। माना की इससे अजीब तरह की गंध आती है पर जो बैक्टीरिया इसमें मौजूद होते हैं वो अच्छे हैं। और रोगों से लड़ने में मदद करते हैं। यह इन्फेक्शन से लड़ते हैं और इसे स्वस्थ बनाए रखते हैं। लगता है कि ये साफ नहीं होते पर शारीर के कई अन्य अंगो से साफ होते हैं।
Tags:
new delhi