जानिए, सच से क्यों परहेज करते हैं मोदी भक्त?


2014 के लोकसभा चुनाव की चुनावी सरगर्मियों से लेकर हाल ही में हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव तक देश में कई ऐसे मुद्दे प्रमुखता से उठाये गए हैं। जिनको लेकर देश के हर व्यक्ति का ध्यान उन मुद्दों पर केंद्रित हुआ है। वाकई मोदी जी आप बेहतरीन राजनेता हैं। आपको जादूगर कहा जाये या फिर बाजीगर? आप अपनी नाकामी छुपाने के लिए इनती अच्छी तरह जनता का माइंड डाइवर्ट कर देते हैं कि सांप ही मर जाता है और लाठी भी नही टूटती है।
मोदी सरकार के दो वर्ष के अंतराल में लव जिहाद, असहिष्णुता, बीफ, गाय, शिक्षा के मंदिर में राम, रोहित वेमुला, जेएनयू विवाद और अब भारत माता की जय का मुद्दा? मुझे बस एक बात झकझोर रही है कि आखिर मोदी सरकार में ही क्यों एक के बाद एक मुद्दे प्रमुखता से उठाये जा रहे हैं। आखिर मोदी सरकार का असल मकसद क्या है? क्यों देश भक्ति की नौटंकी हो रही है?
पठानकोट आतंकी हमले के बाद जेएनयू विवाद और जाँच रिपोर्ट आने से पहले भारत माता की जय का मुद्दा? वो भी एक असदउद्दीन ओवैसी के भारत माता की जय न बोलने के कारण देश में इतना हंगामा और जारी हंगामे के बीच पठानकोट आतंकी हमले के जाँच अधिकारी तंजील अहमद की दिन दहाड़े निर्मम हत्या? एनआईए अधिकारी की हत्या के तार कहीं न कहीं पठानकोट आतंकी हमले की जाँच से जुड़े नजर आ रहे हैं। मीडिया ने हनुमनथप्पा की मौत को इतना हाईलाइट किया कि देशवासियों की सहानभूति उनके साथ हो गई थी। तंजील अहमद की हत्या के मामले में मीडिया का दोगला व्यवहार क्यों? सच सामने लाने के लिए मीडिया की अहम भूमिका होती है। मीडिया सच की तह तक पहुंचना नही चाहती और न इस बात पर किसी से बहस करना चाहती कि आखिर क्यों एक के बाद एक मुद्दा बीजेपी प्रमुखता से उठा रही है।
आखिर पठानकोट आतंकी हमले के पीछे किसका हाथ है? इस आतंकी हमले की पूर्ण जिम्मेदारी न किसी आतंकी संगठन ने ली है और पाकिस्तान ने भी अपना पल्ला झाड़ लिया है। प्रमुखता से देश में उठ रहे मुद्दों और पठानकोट आतंकी हमले की जाँच रिपोर्ट आने से पहले जाँच अधिकारी की हत्या ने मोदी सरकार को सवालों के कटघरे में लाकर खड़ा कर दिया। इधर ख़ुफ़िया अधिकारियों ने अपनी ख़ुफ़िया रिपोर्ट में दावा किया है कि बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश में दंगा कराना चाहते हैं।
इन दिनों देश में हिन्दू-मुस्लिम की सियासत गरमाए हुए है। तिलक-टोपी के नाम पर राजनीति करने वाले और धर्म के ठेकेदार अपनी अपनी जुबानों को धार दे रहे हैं। क्योंकि कभी भी जुबानी जंग तेज हो सकती है। लाशों के ढेर पर ...आगे पढ़ें 

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