यह जेएनयू का सबसे बड़ा सच


नई दिल्ली। कैंपस में 9 फरवरी को लगे देशविरोधी नारे के 2 वीडियो के साथ छेड़छा़ड़ की बात सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि सात में दो वीडियो फर्जी हैं। बाकी वीडियो में भी छेड़छाड़ की गई है।

इससे पहले दिल्ली के पूर्व कमिश्नर बस्सी ने दावा किया था कि कन्हैया के खिलाफ देशद्रोही होने का उनके पास पूख्ता सबूत है। वहीं जो पुलिस कन्हैया के देशद्रोही का दावा कर रही थी वही पुलिस अदालत के सामने सोमवार को अपने दावे से पलट गई।

दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि उसके पास ऐसा कोई वीडियो नहीं है जिसमें कन्हैया को देशविरोधी नारा लगाते हुए देखा जा सके। अब सवाल ये उठता है कि तत्कालीन पुलिस कमिश्नर का कन्हैया को देशद्रोही बताने वाला दावा कहां गया, पूरे देश में माहैौल बिगाड़ने वाला वीडियो कहां गया। क्यों दिल्ली पुलिस अदालत में सबूत नहीं दे पाई और दिल्ली असली गुनगहारों को पकड़ने के बजाए जेएनयू के छात्रों को देशद्रोही बताने पर क्यों तुली थी।

ट्रूथ लैब की फाइनल सप्लीमेंट्री रिपोर्ट में बताया गया है कि सात में दो वीडियो पूरी तरह फर्जी हैं। बाकी वीडियो में भी छेड़छाड़ की गई है। दिल्ली सरकार के ऑर्डर पर हैदराबाद की लैब में इसकी फोरेंसिक जांच की गई थी। गौरतलब है कि जेएनयू में 9 फरवरी को संसद हमले के दोषी अफजल गुरु की बरसी पर कार्यक्रम हुआ था। इसमें देश विरोधी नारे लगे थे। इस सिलसिले में जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार को देशद्रोह के आरोप में अरेस्ट किया गया था।

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