यूपी का सबसे बड़ा अग्निकांड: 742 आशियाने खाक, अब राख और सिसकियां

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यूपी का सबसे बड़ा अग्निकांड: 742 आशियाने खाक, अब राख और सिसकियां

इस साल यूपी का सबसे बड़ा अग्निकांड खैरीगढ़ गांव में हुआ। खैरीगढ़ गांव में  आग के कहर में चार जिंदगियां, 742 आशियाने ही नहीं, खुशियां और ख्वाब भी जलकर खाक हो गए। तिनका-तिनका जोड़कर बनाई गृहस्थी तिनके की तरह जलकर राख हो गई। रात खुले आकाश के नीचे गुजरी। दूसरों को दावत खिलाने वालों ने रात और दिन का खाना दूसरों के रहमो करम पर खाया। होली से एक दिन पहले इस गांव में सिर्फ राख और राख के ढेर में दबे सपनों के सिवा कोई रंग नहीं था।
सोमवार की दोपहर निघासन के खैरीगढ़ गांव में आग लगी थी। बीस मिनट के अन्दर आशियाने खाक हो गए। 50 लाख से ऊपर का नुकसान हुआ। तीन महिलाओं की मौके पर मौत हुई। एक  युवक रात को अस्पताल में दम तोड़ गया। मंगलवार को सरकारी अमले ने जब जले हुए घरों की गिनती की तो अनुमान मीडिया के आंकड़ोें से ऊपर निकल गया। मालूम चला कि इस आग में 742 के करीब आशियाने खाक हुए थे। सोमवार को अफसर तो गांव के सर्वे का हुक्म देकर निकल गए, लेकिन गांव वालों ने पूरी रात खुले आकाश के नीचे बिताई। गांव के पश्चिम छोर से पूरब तक जहां कल तक एक बस्ती आबाद थी, वहां मंगलवार की सुबह उजाड़-वीरान नजर आ रहा था।
बकरियों की खातिर मां मरी, मां की खातिर बेटा
खैरीगढ़ में मां और बेटे दोनों की जलकर मौत हुई है। बूढ़ी अहमदी की जान अपनी बकरियों को बचाने में चली गई। वह छप्पर के नीचे से बकरियां खोल रही थीं, उन पर छप्पर गिर पड़ा। आग में वह जिन्दा भुन गईं। मां को जलते देख बेटा सरफराज आग में कूद पड़ा। मां की जली हुई लाश तो वह निकाल लाया, लेकिन सोमवार रात अस्पताल में उसने भी दम तोड़ दिया।
गुरुद्वारे से चला लंगर, मस्जिद से मिला खाना
सोमवार रात को ही गुरुद्वारा कौड़ियाला घाट से लंगर आ गया। गांव के अग्निपीड़ितों को भोजन कराया गया। मंगलवार सुबह मस्जिद कमेटी की ओर से पीड़ित परिवारों को आलू, आटा और चावल बांटा गया। बसपा नेता मो. कयूम ने दो हजार लंच पैकेट गांव....आगे पढ़ें 

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