कुंभ में साध्वी को जान का खतरा, कहा- ज्ञानदास ने ग़लत ढ़ंग से की छूने की कोशिश


नासिक: नासिक में चल रहे महाकुंभ उत्सव के रंग बिगड़ने लगे हैं. साध्वी त्रिकाल भवंता ने अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष महंत ज्ञान दास पर गंभीर आरोप लगाए हैं.
साध्वी त्रिकाल भवंता का आरोप है कि शुक्रवार को ध्वजारोहण के समय महंत दास ने उन्हें ग़लत ढ़ंग से छूने की कोशिश की.
 
त्रिकाल भवंता ने एबीपी न्यूज़ से कहा कि उन्हें जान का खतरा है और उन्हें डर लग रहा है कि किसी भी समय उनका मर्डर हो सकता है.
 
त्रिकाल भवंता का कहना है कि इस मामले में पुलिस का संज्ञान लेनी चाहिए. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि अगर पुलिस एक्शन नहीं लेती है तो  वह खुद ही शिकायत करेंगी.
 
महंत ज्ञान दास का इनकार
 
साध्वी के आरोप को महंत ज्ञान दास ने खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि ये आरोप उनके खिलाफ बड़ी साजिश हिस्सा है.
 
विवाद
 
दरअसल साध्वी त्रिकाल महिला संतों के परी अखाड़े को कुंभ के दौरान समान अधिकार और स्थान देने की मांग जोर शोर से उठा रही हैं.
 
त्रिकाल चाहती हैं कि उनके नेतृत्ववाले परी अखाड़े की पेशवाई भी इस बार उसी ठाटबाट से निकाले, जैसे सदियों से 13 अखाड़ों की पेशवाई निकलती आ रही है. लेकिन पुरुष संतों-संन्यासियों के अखाड़े इस नई रीति का विरोध कर रहे हैं. परी अखाड़े का निर्माण 2013 के प्रयाग कुंभ के दौरान किया गया था.
 
त्रिकाल भवंता 14वें अखाड़ा की मान्यता की मांग कर रही है. हिंदू धर्म में 13 अखाड़े की परंपरा है.
 
माना जाता है कि अगर परी अखाड़े को पुरुष संतों जैसे अधिकार नहीं मिलते हैं तो ये झगड़ा और ज्यादा बढ़ेगा.
 
कौन हैं त्रिकाल भवंता?
 
1. परी अखाड़ा की मुखिया हैं.
2. परी अखाड़ा महिलाओं का अखाड़ा है.
3. ये 14वां अखाड़ा है, जिसकी मान्यता की लड़ाई त्रिकाल लड़ रही हैं.
4.  हिंदू धर्म में 13 अखाड़े हैं, लेकिन त्रिकाल की मांग है कि उनके अखाड़े को 14वें अखाड़ा का दर्जा दिया जाए.
 
कौन हैं महंत ज्ञानदास
1. महंत ज्ञानदास अयोध्या के मशहूर मंदिर हनुमानगढ़ के महंत हैं.
2. ज्ञानदास अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के पूर्व अध्यक्ष हैं.
3. ज्ञानदास निर्मोही अखाड़ा से आते हैं.
4. इस वक़्त अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरी हैं.
 
क्या है नासिक कुंभ
 
नासिक का सिंहस्थ कुंभ दुनिया का लाखों लोगों के एकत्र होने के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन है.
 
इस आयोजन की शुरुआत शुक्रवार को ध्वजारोहण के एक परंपरागत समारोह के साथ हुई. इसके साथ ही हजारों लोगों ने दो शहरों में गोदावरी नदी में कुशावर्त और रामकुंड में डुबकी लगाई.
 
कुंभ को सबसे बड़े शांतिपूर्ण सम्मेलन के तौर पर जाना जाता है. हिंदू कैलेंडर के हिसाब से यह हर 12 साल में आयोजित होता है. कई अखाड़ों के साधु और लाखों श्रद्धालु इसमें भाग लेते हैं. कुंभ को धार्मिक वैभव और विविधता का प्रतीक भी माना जाता है. यह उत्सव 58 दिनों तक चलेगा और 11 अगस्त को खत्म होगा.
 
त्रयंबकेश्वर में शाही स्नान की तिथि 29 अगस्त, 13 और 25 सितंबर हैं जिसमें विभिन्न अखाड़े भाग लेंगे. शाही स्नान की तिथियों पर नासिक में लगभग 80 लाख और त्रयंबकेश्वर में 25-30 लाख लोगों के जुटने की संभावना है.
 
कुंभ मेले का आयोजन देश में चार स्थान हरिद्वार, इलाहाबाद (प्रयाग), नासिक और उज्जैन में होता है. हिंदू मान्यताओं के अनुसार समुद्रमंथन से प्राप्त अमृत के कुंभ से इन चारों स्थानों पर अमृत की कुछ बूंदें गिर गई थीं. कुंभ की अवधि में इन पवित्र नदियों में डुबकी लगाने से प्राणी मात्र के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं.(साभार-abp )
 

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