आगामी बजट में नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार नोटबंदी के बाद कर की दरों में कमी करके राजस्व बढ़ाने पर विचार कर रही है। सोमवार को वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के मद्देनजर देश में भी करों की दरें कम करने की जरूरत है।
लाइव हिंदुस्तान में छपी खबर के अनुसार कर ढांचे में बदलाव की उम्मीदों को मजबूत करते हुए वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि अब समय आ गया है कि कर की दरें कम हो जिससे सेवाओं को अधिक से अधिक वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाकर आय को बढ़ाया जाए। इससे आगे चलकर सेवाओं में यही महत्वपूर्ण बदलाव नजर आएगा। राजस्व को बढ़ाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में देश में ऐसा वातावरण तैयार करना होगा जिससे लोग नियमों का पालन करें और स्वेच्छा से उचित कर की अदायगी करें। आने वाले दशकों में देश एक ऐसा राष्ट्र बनने जा रहा है जहां कर को लेकर लोग स्वयं नियमों का पालन करेंगे। याद रहे कि मौजूदा समय कर छूट की सीमा ढाई लाख है, माना जा रहा जब इसे बढ़ाकर चार लाख रूपये किया जा सकता है
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कर चोर नहीं बचेंगे
वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि जो कर अदा नहीं करते उन्हें गंभीर सजा भुगतान के लिए तैयार रहना चाहिए। जेटली ने कहा कि 70 साल से लोगों के बीच एक धारणा बनी हुई थी कि कर की चोरी कर लेना व्यवसायिक सूझबूझ है, लेकिन सरकार ऐसी व्यवस्था का निर्माण करेगी जिससे लोग कर चोरी करने से बच ही नहीं पाएंगे। उन्होंने कहा कि कहा कि आजादी के बाद यह माना जाने लगा कि सरकारी राजस्व की अदायगी नहीं करना कोई अनैतिक काम नहीं। इसे कारोबारी सूझबूझ का एक भाग समझा जाता रहा है, लेकिन उपेक्षा की वजह से लोगों को गंभीर नतीजे भी भुगतने पड़े। उन्होंने आगे कहा कि वाजिब कर की अदायगी देश के लोगों का दायित्व है और कर नहीं चुकाने के गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं।
वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि जो कर अदा नहीं करते उन्हें गंभीर सजा भुगतान के लिए तैयार रहना चाहिए। जेटली ने कहा कि 70 साल से लोगों के बीच एक धारणा बनी हुई थी कि कर की चोरी कर लेना व्यवसायिक सूझबूझ है, लेकिन सरकार ऐसी व्यवस्था का निर्माण करेगी जिससे लोग कर चोरी करने से बच ही नहीं पाएंगे। उन्होंने कहा कि कहा कि आजादी के बाद यह माना जाने लगा कि सरकारी राजस्व की अदायगी नहीं करना कोई अनैतिक काम नहीं। इसे कारोबारी सूझबूझ का एक भाग समझा जाता रहा है, लेकिन उपेक्षा की वजह से लोगों को गंभीर नतीजे भी भुगतने पड़े। उन्होंने आगे कहा कि वाजिब कर की अदायगी देश के लोगों का दायित्व है और कर नहीं चुकाने के गंभीर परिणाम भुगतने पड़ते हैं।
सिंचाई में निवेश पर जोर
कृषि में सिंचाई के महत्व को रेखांकित करते हुए वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि अगर आप निर्माण क्षेत्र में निवेश करते हैं तो इसका प्रभाव देखने में दो-तीन साल लग सकता है, लेकिन सिंचाई मे निवेश का असर अगले सीजन में ही दिखने लगता है। साथ ही प्रधानमंत्री के बयान को लेकर पैदा भ्रम की स्थिति पर उन्होंने स्पष्ट किया कि शेयर की खरीद-फरोख्त में दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ पर कर आरोपित करने का सरकार का कोई इरादा नहीं है। याद रहे कि निवेशकों के लिए पूंजीगत लाभ का मुद्दा बहुत ही संवेदनशील है। गौरतलब है कि नोटबंदी के बाद ऐसी चर्चा जोरों पर है कि सरकार आगामी वित्त वर्ष के बजट में कर की दरों में कमी कर सकती है जिससे लोग स्वेच्छा से कर की अदायगी के लिए खुद आगे आएंगे।
कृषि में सिंचाई के महत्व को रेखांकित करते हुए वित्त मंत्री जेटली ने कहा कि अगर आप निर्माण क्षेत्र में निवेश करते हैं तो इसका प्रभाव देखने में दो-तीन साल लग सकता है, लेकिन सिंचाई मे निवेश का असर अगले सीजन में ही दिखने लगता है। साथ ही प्रधानमंत्री के बयान को लेकर पैदा भ्रम की स्थिति पर उन्होंने स्पष्ट किया कि शेयर की खरीद-फरोख्त में दीर्घकालीन पूंजीगत लाभ पर कर आरोपित करने का सरकार का कोई इरादा नहीं है। याद रहे कि निवेशकों के लिए पूंजीगत लाभ का मुद्दा बहुत ही संवेदनशील है। गौरतलब है कि नोटबंदी के बाद ऐसी चर्चा जोरों पर है कि सरकार आगामी वित्त वर्ष के बजट में कर की दरों में कमी कर सकती है जिससे लोग स्वेच्छा से कर की अदायगी के लिए खुद आगे आएंगे।