देश से भ्रष्टाचार कभी ख़त्म नही होगा मोदी जी.....

 
अमन पठान
पीएम मोदी ने कानपुर रैली में कहा था कि हमारा एजेंडा है कि भ्रष्टाचार बंद हो और उनका संसद बंद हो? मैं पीएम मोदी को कोरे कागज पर लिखकर दे सकता हूँ और पूर्ण विश्वास के साथ कहता हूँ कि कोई कितनी भी कोशिश करले उसके बाबजूद देश से भ्रष्टाचार ख़त्म नही हो सकता? क्योंकि भ्रष्टाचार हमारे खून में शामिल हो चुका है।
 

चपरासी से लेकर अफसर और अफसर से लेकर मंत्री तक के खून में भ्रष्टाचार की बीमारी फ़ैल चुकी है। ऐसा नही है कि भ्रष्टाचार की बीमारी की चपेट में यही लोग आये हैं। देश का चौथा स्तम्भ यानी पत्रकारिता ही भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए सबसे ज्यादा दोषी है। क्योंकि अगर कोई भ्रष्टाचार का मामला प्रकाश में आता है तो ईमानदारी की दुहाई देने वाले पत्रकार अपने हिस्से की सुविधा शुल्क लेकर पूरे मामले को बिना डकार लिए हजम कर जाते हैं।
 

भ्रष्टाचार की बीमारी फ़ैलाने वाला वही आम आदमी है जो आज हाय हाय भ्रष्टाचार चिल्ला रहा है। सरकारी अस्पताल में एंटी रैवीज इंजेक्शन के लिए, कभी आय प्रमाण पत्र बनवाने के लिए तो कभी पुलिस की कार्रवाई से बचने के लिए आम आदमी खुद सुविधा शुल्क की पेशकश करता है। फिर चारों ओर चिल्ला फिरता है कि देश में बहुत भ्रष्टाचार है। भ्रष्टाचार का जन्मदाता अपनी भ्रष्टाचारी औलाद को कैसे ख़त्म कर सकता है। क्योंकि दुनिया में औलाद से ज्यादा प्यारी दूसरी कोई चीज नही होती है। आम आदमी ने भ्रष्टाचार को पैदा किया है। पीएम मोदी के एनकाउंटर से भ्रष्टाचारी ख़त्म हो सकते हैं, लेकिन भ्रष्टाचार नही? भ्रष्टाचार तो भ्रष्टाचार पैदा करने वाला ही ख़त्म कर सकता है।
भ्रष्टाचार के पैदा होने में इंडिया की जुगाड़ की अहम भूमिका होती है। इंडिया की जुगाड़ पर तमाम जोक भी प्रकाशित हो चुके हैं। लोग बड़े गर्व से कहते भी हैं कि जो काम किसी तरह नही होता है तो वो काम जुगाड़ से हो जाता है। भारत क्या विदेशों में भी इंडिया की जुगाड़ बहुत मशहूर है। अगर आपका मोबाइल ख़राब हो जाये तो जुगाड़ से ठीक हो जाता है। पुलिस किसी को पकड़ ले तो वो जुगाड़ से छूट जाता है। यहाँ तक कि नेताओं की सरकारें भी जुगाड़ से बन जाती हैं। अगर हमें देश से भ्रष्टाचार ख़त्म करना है तो सबसे पहले हमें जुगाड़ से काम लेना बंद करना होगा। तभी देश से भ्रष्टाचार का खात्मा हो सकता है अन्यथा भ्रष्टाचार ख़त्म करने की जंग लड़ते रहिये। भ्रष्टाचार की जंग लड़ने वाले ख़त्म हो जाएंगे, लेकिन भ्रष्टाचार ख़त्म नही होगा?
(अमन पठान केयर ऑफ़ मीडिया के संपादक हैं। लेखक के विचार पूर्णत: निजी हैं, amethilive.in इसमें उल्‍लेखित बातों का न तो समर्थन करता है और न ही इसके पक्ष या विपक्ष में अपनी सहमति जाहिर करता है। )

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