पाकिस्तान में हिंदुओं को मिली मंदिर और श्मशान के लिए जगह

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पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद की एक प्रशासनिक इकाई ने बताया है कि हिंदू समुदाय के लोगों को धार्मिक अनुष्ठानों के लिए ख़ास जगह मुहैया कराई गई है.
बीबीसी से बात करते हुए इस्लामाबाद के डिप्टी मेयर ज़ीशान नक़वी ने बताया, "हिंदू समुदाय की लंबे समय से यह मांग थी कि राजधानी में उन्हें कुछ जगह दी जाए, ताकि अंतिम संस्कार के लिए वे श्मशान घाट बना सकें. साथ ही एक सामुदायिक केंद्र और मंदिर भी बना सकें."
ज़ीशान नक़वी ने बताया कि हिंदुओं को इस्लामाबाद के सेक्टर-एच में एक प्लॉट दिया गया है और हिंदू समुदाय के परामर्श से ही यहां निर्माण कार्य किया जाएगा.
नक़वी ने बताया कि हिंदू समुदाय के लोग अब तक अंतिम संस्कार के लिए बौद्धधर्मियों के श्मशान घाट का इस्तेमाल करते रहे हैं, लेकिन अब उनके पास अपना श्मशान घाट और अन्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी.
इस्लामाबाद में हिंदू पंचायत के महासचिव अशोक चंद के अनुसार शहर में हिंदुओं की धार्मिक अनुष्ठानों के लिए जगह देने की मांग काफी पुरानी है. बेनज़ीर भुट्टो की सरकार में भी इस मुद्दे को उठाया गया था लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई.
अशोक ने कहा कि इस समय इस्लामाबाद में करीब 125 हिंदू परिवार बसे हैं और कुल एक हज़ार के करीब लोग हैं.




अशोक चंद ने जगह मिलने पर हिंदू समुदाय की ओर से खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि इसके लिए लंबी जद्दोजहद करनी पड़ी, जिसमें नेशनल कमीशन ऑफ ह्यूमन राइट्स ने उनकी बहुत मदद की.
उन्होंने बताया कि पहले उन्हें कहा गया था कि बौद्धधर्मियों के लिए आरक्षित जगह को ही हिंदू अपने अंतिम धार्मिक अनुष्ठानों के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. लेकिन मानवाधिकार आयोग ने इसका विरोध किया और कहा कि बौद्धधर्मियों के अधिकारों को मारा नहीं जाए. साथ ही हिंदू भी पाकिस्तान के नागरिक हैं, इसलिए उन्हें उनके अधिकार दिए जाएं.
इसके अलावा रावलपिंडी और अटक में एक श्मशान घाट है, जो जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जाता है.
अशोक चंद ने बताया कि जल्द ही आवंटित ज़मीन पर सामुदायिक केंद्र, मंदिर और श्मशान घाट बनाए जाएंगे. अगर सरकार की ओर से कोई वित्तीय मदद नहीं मिली, तो हिंदू समाज चंदा इकट्ठा करके यहां मंदिर और अन्य सुविधाएं तैयार करेगा.
शरणार्थी वक्फ संपत्ति बोर्ड के चेयरमेन रशीद ने बीबीसी को बताया कि वह इस्लामाबाद में हिंदुओं को मंदिर और अन्य सुविधाएं तैयार करने में मदद करेंगे.
स्थानीय लोगों की मानें, तो इस फैसले के बाद पाकिस्तान को उस नकारात्मक प्रचार से छुटकारा मिल सकेगा, जिसके तहत उसे दुनिया के 'अल्पसंख्यकों के प्रति कट्टर' देशों में शामिल किया गया है.


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