
अमन पठान
एटा। किसी कारण से न्याय की कुर्सी सत्य से डगमगाने लगती है या किसी फरियादी की फरियाद कहीं नही सुनी जाती है तो वह पत्रकारों से उम्मीद करता है कि वह उसे न्याय दिलवाने में अहम भूमिका निभाएंगे, मारहरा में तो पत्रकारों ने खबर छापने की एक रेट लिस्ट बना रखी है। भैंस मरने की खबर छपवाने के लिए 1500 रूपये की शुल्क निर्धारित की गई है।
मारहरा के गांव हयातपुर माफ़ी में बीते दिनों एक पशु पालक के तबेले में अज्ञात कारणों से आग लग गई। आग से जलकर एक भैंस की मौके पर मौत हो गई तथा एक भैंस बुरी तरह झुलस गई। पशु पालक ने मुआवजे के इरादे से आगरा से प्रकाशित एक बहुचर्चित हिंदी दैनिक अखबार के पत्रकार से खबर छापने की गुहार लगाई तो पत्रकार ने उसे जले पर नमक छिड़कने का काम किया और खबर छापने के एवज में 1500 रूपये मांगे। गरीब पशु पालक ने पत्रकार को पैसे देने से इंकार कर दिया। जिस कारण उसकी खबर प्रकाशित नही हो सकी। /span>
दलाल पत्रकारों ने पत्रकारिता को पक्षकारिता में तब्दील कर दिया है। खबर छापने के नाम पर पैसे मांगने वाले पत्रकार पत्रकारिता पर एक बदनुमा दाग और कलंक हैं। ऐसे पत्रकारों का पत्रकारिता क्षेत्र से बहिष्कार होना चाहिए। संपादकों और जिला सूचना अधिकारी को इस तरह का कृत्य करने वाले पत्रकारों को सजा देनी चाहिए, ताकि पत्रकारिता की गरिमा बनी रहे।
Tags:
uttar pradesh