
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को अचानक से 1000 और 500 के नोट बंद करने की घोषणा कर दी। अचानक हुई इस घोषणा के बाद देशभर में हलचल मच गई। सरकार द्वारा इस औचक घोषणा और नोट बंद करने की कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय बताया गया। बताया गया कि इस मामले की जानकारी सिर्फ प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री तक ही सीमित थी। लेकिन कई चीजें इस सीक्रेट पर सवाल खड़ा कर रही हैं।
दरअसल दैनिक जागरण वेब ने 26 अक्टूबर को एक खबर प्रकाशित की थी। वहीं प्रिंट में 27 अक्टूबर को प्रकाशित की गई थी। इसमें साफ तौर पर नोट बंद की जानकारी तो नहीं दी गई थी लेकिन इशारा किया गया था। इसकी हैडिंग थी.... अब आएगा दो हजार का नोट, पहले जारी हो चुका दस हजार का नोट
खबर में लिखा है....
''कानपुर (बृजेश दुबे)। केंद्र सरकार काला धन निकालने के लिए जल्द ही नया कदम उठा रही है, जिसके लिए सरकार दो हजार रुपये का नोट जारी करने की तैयारी में है। आरबीआइ जल्द ही हाई सिक्योरिटी फीचर वाले दो हजार रुपये का नोट प्रचलन में ला सकती है। इसके साथ ही जाली नोटों पर अंकुश लगाने के लिए एक हजार व पांच सौ रुपये के नोट को लेकर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
माना जा रहा है कि आय घोषणा योजना 2016 में घोषित आय को नाकाफी मानते हुए सरकार यह रुख अपना रही है। सूत्रों का कहना है कि इसकी तैयारी हो चुकी है। आरबीआइ ने दो हजार रुपये के हाई सिक्योरिटी फीचर वाले नोट छपने के लिए दे दिए हैं। जल्द ही यह नोट बाजार में दिख सकते हैं। जानकारी के अनुसार देश में प्रचलित करेंसी में सबसे बड़ा हिस्सा पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट का है। हालांकि इसके लिए अभी कोई आधिकारिक सूचना जारी नहीं हुई है लेकिन सूत्रों का कहना है कि सरकार विभिन्न मूल्य वर्ग के नए नोट जारी करने जा रही है।''
इसके अलावा राजस्थान पत्रिका की खबर भी इस सीक्रेट में लीकेज का इशारा कर रही है। इसके अनुसार, देश भर के बैंकों में गुरुवार से दो हजार रुपये के नए नोट मिलने शुरू हो गए हैं। पांच सौ और एक हजार के पुराने नोट के बदले इन्हें दिया जा रहा है। इस बीच तमिलनाडु में नए नोट जारी होने से पहले ही दो हजार रुपये के 36 हजार नए नोट मिलने से हड़कंप मच गया।
दरअसल तंजावुर में चुनाव अधिकारियों की सर्विलांस टीम ने एक वैन से 7 करोड़ 85 लाख रुपये जब्त किए। पट्टुकोटई रोड पर मेलावस्ताचावड़ी इलाके में खुफिया जानकारी मिलने के बाद चुनाव अधिकारियों ने वैन की जांच की, तो उससे करोड़ों रुपये मिले।
गुजरात के अखबार को छह महीने पहले ही थी जानकारी!
ये तो हालिया लीकेज की घटनाएं हैं। गुजरात के एक अखबार ने तो अप्रैल में ही यह खबर छाप दी थी। इस खबर की क्लिप तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। गुजरात के सौराष्ट्र बेस्ड अखबार अकीला ने एक अप्रैल को यह खबर प्रकाशित की थी। हालांकि इसे अप्रैल फूल बनाने वाली खबर माना गया। लेकिन महज संयोग कहना गलत होगा क्योंकि इस खबर में ताजा मामले की सारी जानकारी उसी समय दे दी गई थी।


