रिव्यू : एक्शन और स्टाइल से भरपूर लेकिन नई नहीं है 'फोर्स-2' की कहानी | 3 स्टार

रिव्यू : एक्शन और स्टाइल से भरपूर लेकिन नई नहीं है 'फोर्स-2' की कहानी | 3 स्टार

मुंबई: फिल्म 'फोर्स-2' की कहानी है मुम्बई पुलिस कॉप हर्षवर्धन और रॉ एजेंट केके की जो एक गद्दार रॉ एजेंट को ढूंढने के लिए मिशन पर निकलते हैं. इस रॉ एजेंट की वजह से चीन में तीन भारतीय रॉ एजेंट की हत्या हुई है और बाकी बचे रॉ एजेंटों की जान को ख़तरा है. हर्षवर्धन यानी जॉन इस मिशन में इसलिए शामिल होते हैं क्योंकि चीन में मरे तीन में से एक उनका सबसे अच्छा दोस्त था और वह मरने से पहले जॉन को एक क्लू दे जाता है.

'फोर्स - 2' एक एक्शन थ्रिलर फिल्म है जिसमें जॉन अब्राहम ने जबरदस्त एक्शन किया है. चूंकि मिशन बूडापेस्ट में है इसलिए वहां के सुन्दर नजारे फिल्म में देखने को मिलेंगे. इस शहर के बीचों-बीच छप्पर पर दौड़ने भागने और पकड़ने के पूरे सीक्वेंस को बेहतरीन तरीके से फिल्माया गया है. सड़कों पर तेज रफ्तार से दौड़ती भागती और पीछा करती गाड़ियों के दृश्य भी अच्छे हैं. करीब दो घंटे की फिल्म की पटकथा इतनी सधी हुई है कि आपको बोर होने नहीं देगी. अभिनय देव का निर्देशन भी ठीक है.


यह फिल्म एक्शन और स्टाइल से भरपूर तो है मगर कहानी में कुछ नयापन नहीं है. कहने को यह जासूसों की फिल्म है मगर जासूसी ही कम है. जॉन हों या सोनाक्षी, इनके पास अभिनय के लिए ज़यादा स्कोप नहीं था. हां, ताहिर राज भसीन ने अच्छी एक्टिंग की है.

यह फिल्म एक बात और बताती है कि रॉ एजेंट जान-बूझकर अपनी जान को जोखिम में डालते हैं और देश की सेवा करते हैं. मगर दूसरे देशों में जासूसी करते हुए पकडे़ जाने के बाद देश उन्हें पहचानने से इंकार कर देता है. कभी-कभी तो देश द्रोही का ठप्पा भी लगा देता है. फिल्म का यह संदेश दिल को छूता है इसलिए 'फोर्स-2' के लिए मेरी रेटिंग है 3 स्टार.

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