मुंबई। घना जंगल...चारों ओर जानवर ही जानवर...उछलते-कूछते बंदर...दहाड़ लगाते शेर... इन सबके बीच में शेरखान और मोगली। द जंगल बुक फिल्म उन लोगों को बेहद खास है, जिन्होंने 90 के दशक में अपना बचपन गुजारा और दूरदर्शन में जंगल बुक के साक्षी रहे। उनका बचपन एक फिर लौट आया है। एक बार फिर जंगल बुक उनके सामने है। वहीं गीत है- जंगल जंगल बात चली है...। --> वाकई द जंगल बुक ने एक बार 90 के बचपन में ताजगी भर दी है और आज के बचपन को न ताजगी दी है। खास बात तो यह है कि जंगल बुक की यादें जेहन से कभी नहीं मिट सकतीं। दूसरी ओर निर्देशक जोन फेवरियू ने इस चिरकालिक स्मृति.....
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