मंगलवार शाम करीब 4 बजे का समय .. श्रीनगर के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) में हर तरफ तनाव पसरा था। हम पर बर्बरता से लाठियां बरसाई जा रही थी। हमारा कुसूर यह था कि हम भारत माता की जय के नारे लगा रहे थे। आखिर हमारा गुनाह क्या था, क्या वे भारत की हार पर जश्न मनाते रहें और हम खामोश देखते रहें...क्या इसी नियती को हम युवा आजादी मानें...क्या हमारे राष्ट्र के खिलाफ उठती आवाजों को लेकर हमारा खून न खौले...हमें बस जवाब चाहिए...हमें लाठियां क्यों मिली।
ये दर्द है जम्मू पुलिस की बर्बरता का शिकार हुए एनआईटी श्रीनगर के गैर कश्मीरी छात्रों में से एक राजधानी के सत्यम कुमार का। इन छात्रों में तकरीबन 500 युवा उत्तर प्रदेश और 20 से ज्यादा राजधानी लखनऊ के हैं। तबसे एनआईटी में मातम का सा माहौल है। कुछेक छात्र अपनी फेसबुक वॉल में इसे अघोषित इमरजेंसी भी लिख रहे हैं।
हरषि ने कहा, ‘ 31 मार्च को टी-20 मैच समाप्त होने के बाद पूरा कैंपस अराजकता की चपेट में था। कुछ छात्रों ने वेस्टइंडीज के मैच जीतने के बाद पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। पटाखे फोड़े जाने लगे और देश के प्रति अपशब्द कहे गए। इसका छात्रों के एक समूह ने विरोध किया। भारत माता के जयकारे लगाने शुरू कर दिए। विरोधी छात्रों ने रात में हॉस्टल पर पथराव किया।जो छात्र उनके कब्जे में आ गए उन्हें बेरहमी से मारा-पीटा। हंगामे के बाद रात में ही छात्रों ने तिरंगा मंगाया और एनआईटी कैंपस में लहराया। रात जैसे-तैसे गुजरी और सुबह कैंपस का माहौल और गर्म हो गया। कक्षाएं बाधित हो गईं।’ एक छात्र ने कहा कि अब वे कैंपस से बाहर नहीं निकल रहे। मेस तक जाने में डर लगा है। अपने अपने कमरों में कैद से हो गए हैं।
एनआईटी की घटना से सहमा परिवार
बाबूपुरवा कॉलोनी स्थित हरषि के परिवार के लोग सहमे हुए हैं। टेलीविजन पर...आगे पढ़ें
बाबूपुरवा कॉलोनी स्थित हरषि के परिवार के लोग सहमे हुए हैं। टेलीविजन पर...आगे पढ़ें
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