आशुतोष झा, नई दिल्ली। भाजपा अब प्रयोगों को छोड़ सधे कदमों से जातिगत समीकरण और विचारधारा से जुड़े क्षेत्रीय चेहरों के साथ आगे बढ़ेगी। शुक्रवार को उत्तर प्रदेश, पंजाब और कर्नाटक सहित पांच राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों की नियुक्ति में इसका स्पष्ट संकेत दे दिया गया है। चुनावी दृष्टि से जहां सभी अध्यक्षों की जातियां अहम हैं वहीं संघ से उनका रिश्ता भी मजबूत रहा है।
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